उत्तरापथ

तक्षशिला से मगध तक यात्रा एक संकल्प की . . .

सत्य पथ


सत्य का पथ
कहते है कि बडा
कन्ट्काकीर्ण होता है
सत्य का पथ !

पर
अनुभव तो है ये कि
सत्यपथ सदाही
मनोहर होता है।

हां बाधायें तो निश्चित
अधिक आयेंगी।
पर हौसला भी तो
औरों से अधिक होगा।
साथी भी भले
संख्या में कम लगे
पर होंगे सच्चे और पक्के।
सत्यपथ के
सहपथिक ही
साथी कहलाते है।

तो साथी कभी
अकेला
ना अनुभव करना।
चाहे देनी पडे
सैंकडों बार
अग्निपरीक्षा !

या किसी  धोबी के
भौंकने से
करना पडे बार बार
वनगमन!

हे मेरे सत्यपथी
छोडना न साथ
सत्य का
तोड़ना न व्रत
धर्म का …

जून 25, 2011 Posted by | कविता | 3 टिप्पणियाँ

   

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