उत्तरापथ

तक्षशिला से मगध तक यात्रा एक संकल्प की . . .

या देवी सर्व भूतेषु दायित्व रूपेण संस्थिता . . .


दायित्व:
देवी भागवत में शुम्भ-निशुम्भ की कथा आती है। ये दोनों मधु-कैटभ के ही वंशज है। उनके वध का प्रतिशोध लेना चाहते है। अपना सशक्त साम्राज्य बना लिया है। ब्रह्माजी से तपस्या कर  वरदान पा लिया कि कोई नर चाहे मानव हो या पशु के हाथों मृत्यु नहीं होगी। उनको दम्भ है कि कोई मादा, नारी से क्या ड़र। वे माता की शक्ति से अपरिचित है क्योंकि स्त्री को मादा के रूप में ही देखते है। यह असुर विचार का एक लक्षण है। नारी को मादा के रूप में भोग का साधन समझना। भारतीय संस्कृति में हर बाला को माँ के रूप में ही देखा जाता है। आज सप्तमी है। कुमारी पूजा का दिन है। स्वामी विवेकानन्द स्वयं कुमारी के अन्दर दिव्यता के दर्शन कर कुमारी पूजा करते थे। कश्मिर में क्षीरभवानि में आसपास जब कोई हिन्दू बालिका नहीं थी तो नाववाले मुसलमान की बेटी की स्वामीजी ने कुमारी पूजा की। वो नाववाला भी गद् गद् हुआ। आज भी कश्मिर के मुसलमान अपने आप को पंडीतों के वंशज मानते है। राजनीति और पाकीस्तान के हस्तक्षेप से मामला बिगड़ा हुआ है।
तो शुम्भ-निशुम्भ के आतंक से पीड़ित देवताओं ने माता दूर्गा की प्रार्थना की। पार्वती ने देवताओं पर दया कर कौशिकी का रूप लिया। उसे काली या कालरात्री भी कहते है। कहीं कही काली को उनकी सहायक के रूप में भी बताया गया है। वैसे इस युद्ध में सभी देवताओं की शक्तियाँ देवी के साथ लड़ी थी। कुल सात देवियों ने मिलकर धुम्रलोचन, चण्ड-मुण्ड, रक्तबीज सहित लाखों असुर सेना का नाश कर दिया। चमूत्व (Team) की शक्ति का यह चमत्कार था। धुम्रलोचन के साथ सबसे पहले युद्ध हुआ। उस समय कौशिकी माता ने अकेले ही अपने वाहन सिंह के साथ 60000 असुरों का वध कर दिया। फिर चण्ड मुण्ड अनेक मायावी दानवों की सेना लेकर आये। तब सातों देवियों ने मिलकर उनका निःपात किया। इसी से देवी का एक नाम चामुण्डा पड़ा। रक्तबीज का वरदान विचित्र था। उसके रक्त की बून्द जमीन पर गिरने से उसमें से और दानव उत्पन्न हो जाते। क्लोनिंग की कितनी उन्नत विधि? तो देवी ने काली को दायित्व दिया कि अपने खप्पर में रक्तबीज के रक्त के हर बून्द को धरती पर गिरने पहले ही पकड़ लो। और देवी ने उसके मस्तक का छेद कर दिया।
यह चमुत्व संगठन की शक्ति को कई गुणा बढ़ा देता है। कम कार्यकर्ता भी बड़े बड़े चमत्कार कर देते है। शिवाजी की सेना की सफलता का यही रहस्य था। चमु में सबका दायित्व स्पष्ट होना आवश्यक होता है। संगठन में प्रत्येक कार्यकर्ता का तय दायित्व हो ताकि कोई भ्रम अथवा कार्य का दोहराव ना हो। सब अपना अपना दायित्व निभाते हुए एक-दूसरे के पूरक बनें। दायित्व ही कार्यकर्ता का परिचय हो जाता है। इससे कार्य में व्यक्तिगतता नहीं आती। कार्य व्यक्ति निरपेक्ष हो जाता है। अपने दायित्व से कार्यकर्ता का आत्मबल, क्षमता और प्रभाव बढ़ता है। अन्यथा सामान्य गुणोंवाला कार्यकर्ता भी असामान्य परिणाम देता है।
कालरात्री का वाहन गर्दभ है। कार्यकर्ता भी चाहे जिस श्रेणी का हो दायित्व रूपी देवी की सवारी बनते ही वह भी पूजनीय हो जाता है। दायित्ववान कार्यकर्ता संगठन को अपने लक्ष्य कीओर अग्रेसर करता है। आदर्श चमु में हर दायित्व के लिये कार्य कर्ता और हर कार्यकर्ता के लिये दायित्व होता है। हम अपने दायितव का पूर्ण निर्वाह करते हुए कालरात्री की पूजा करें। यही हमारा कुमारी पूजन है। इसीसे वर्तमान असुर सेना का नाश होगा। खप्परवाली का खप्पर खाली ना रहे। कोई कार्यकर्ता दायित्व बिना न रहे!

अक्टूबर 3, 2011 - Posted by | सामायिक टिपण्णी

1 टिप्पणी »

  1. Reblogged this on उत्तरापथ and commented:

    आज सप्तमी है ! उस अवसर पर लिखा पुराना लेख आज पुनः दल रहा हूँ | बदले सन्दर्भों में भी पूर्ण सार्थक

    टिप्पणी द्वारा uttarapath | अक्टूबर 8, 2016 | प्रतिक्रिया


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