उत्तरापथ

तक्षशिला से मगध तक यात्रा एक संकल्प की . . .

संगठन की घटस्थापना


 

पहले रात्री की देवी है – शैलपुत्री। हिमालय की पुत्री होने के नाते माँ पार्वती का ही यह नाम है। हिमवान की पुत्री ने उसी के समान कठोर तपस्या से भगवान शिव को प्रसन्न किया। यदि हमारे लक्ष्य को हम शिव अर्थात कल्याण करनेवाला मानते हैं तो हमारा संगठन उन्हें पाने के लिये ही कार्य कर रहा है। इस उद्देश्य में सिद्धी तभी सम्भव है जब संगठन का जन्म उदात्त ध्येय के लिये हुआ हो। ध्येय जितना उँचा होगा उतना ही संगठन का मूल बल अधिक होगा। किसी भी संगठन की प्रथम शक्ति उसके ध्येय की नैतिक उदात्तता होती है। अतः शैलपुत्री का संदेश है। शैल समान उदात्त विचार से हुआ जन्म। किसी भी संगठन का जन्म एक विचार से होता है। यदि वह विचार संकुचित हो तो संगठन नहीं होगा, गिरोह होगा। यदि ध्येय स्वार्थ होगा तो संगठन व्यापारी संस्थान ही होगा। इसी कारण राजनीतिक संगठन जब अपने उदात्त ध्येयवाद को भुला देते हैं अथवा जिन दलों का जन्म ही व्यक्तिगत अहंकार वा स्वार्थ से हुआ होता है, वे शीघ्र ही एक व्यापारी संस्थान का रूप ले लेते हैं। दीर्घकाल तक मानव कल्याण के कार्य का ध्येय प्राप्त करते हुए कार्य करने वाले संगठन वे ही हो सकते हैं जिनके मूल में हिमालय सा भव्य व दिव्य विचार होता है।

विचार के उदात्त होने के साथ ही उसके मूर्त रूप में उतरने के लिये प्रखर तप भी करना पड़ता है। पार्वती ने शिवजी को पाने के लिये उग्र तप किया। स्वयं को पूर्ण समर्पित कर दिया। ऐसे समय जब शिवजी उनकी ओर देखने को भी तैयार नहीं थे तब भी पूर्ण लगन से अपनी तपस्या को जारी रखा। सच्चे कार्यकर्ता को भी ध्येय के प्रति पूर्ण श्रद्धा रखते हुए कार्य करना चाहिए। कई बार बाहरी रूप से कोई परिणाम अथवा यश नहीं दिखाई देता, तब भी यदि लगन टिक सकें तो ही अन्ततः लक्ष्यप्राप्ति हो पाती है। इसका एक ही मार्ग है – सतत अपने जन्म के रहस्य अर्थात अपने संगठन के बीज विचार का स्मरण। यदि उस विचार की उदात्तता व सत्यता पर विश्वास दृढ़ हो तो फिर कितनी भी निराशाजनक परिस्थिति में कार्यकर्ता अपने पथ से विचलित नहीं होता।

माँ शैलपुत्री का नाम ही कार्यकर्ता को प्रेरणा देता है अपने पिता अर्थात अपने मूल को सदा अपने परिचय के रूप में धारण करने की। हमारा विचार ही हमारा सच्चा परिचय होता है। जब हम किसी महान कार्य में जुटे संगठन के अंग होते हैं, तब वह संगठन विचार ही हमारा एकमात्र स्थायी आधार होता है। वही हमें शक्ति प्रदान करता है। माता शैलपुत्री का रूप भी अत्यन्त सांकेतिक है। पहले नवरात्री को इसका पूजन करते समय इसके अर्थ को समझना चाहिये। माता का वाहन श्वेत वृषभ है – सफेद बैल। यह शक्ति का सनातन प्रतिक है। हमारी ध्येय साधना का वाहन ऐसा ही बलवान हो। शुभ्र रंग बल की सात्विकता का द्योतक है। बल जब कल्याणकारी होता है तब सात्विक होता है। जब औरों को पीड़ा देने में बल का प्रयोग होता है, तब वह तामसिक बल कहलाता है और जब बल का गर्व कर उसका दुरूपयोग होता है, तब वह राजसिक बल होता है। संगठन हमें बल प्रदान करता है। वह सात्विक तभी होगा जब हम उसका प्रयोग संगठन की ध्येयप्राप्ति में ही करेंगे, अपने स्वार्थ अथवा दूसरों की हानि के लिये नहीं।

शैलपुत्री माता के एक हाथ में त्रिशूल है और दूसरे में कमल। इस प्रतिक का भी यही अर्थ है। कमल शांति का प्रतिक है और त्रिशूल साधनों का। संगठन हमें अनेक शस्त्र अर्थात विविध साधन प्रदान करता है। यह आंतरिक गुणों के रूप में भी होते हैं और बाह्य संसाधनों, सम्पर्कों के रूप में भी। इनका भी उपयोग संगठन के ध्येय के अनुरूप सबके कल्याण व शांति के लिये करना होता है।

आइये, पहले नवरात्री को संगठन की शक्तिपूजा की घटस्थापना करते है। माँ शैलपुत्री की पूजा में हिमालय सा उदात्त विचार व उसके आचरण हेतु तप व प्राप्त बल का सदुपयोग करने का संकल्प लेते हैं। माता हमें संगठन को सशक्त बनाने का शुभाशिष प्रदान करें।

 

अक्टूबर 5, 2013 - Posted by | सामायिक टिपण्णी | , , , , , , , , , , , , , ,

14 टिप्पणियाँ »

  1. संगठित होकर समाज के सशक्तिकरण के लिए उत्साह के साथ काम करने के लिए संकल्प लेते हुए नवरात्री की शुभकामनाएं

    टिप्पणी द्वारा लोकेन्द्र सिंह | अक्टूबर 6, 2013 | प्रतिक्रिया

  2. Bahut sundar. Pichle kuchh dino se (jabse patel nagar me rehne aaya hu) mujhe bahut achche achche sundar varnan padhne or sunne ko mil rahe hain. Kal hi Manneeya Nivedita Didi ka Ram Katha ka recorded varnan poora kiya hai 9 din ka. (1 din 1 varnan) Aisa pehle kabhi nahi socha tha ki Ramkatha ye kehti hai. Humne Ram ko imaginary figure bana diya hai. Kal Unka Jeevan sandesh samajh me aaya. Aisa hi Hanuman ek kitne kushal karyakarta hain,ye samajh aaya.
    Maja aaya.

    टिप्पणी द्वारा Naman Sharma | अक्टूबर 6, 2013 | प्रतिक्रिया

  3. Reblogged this on उत्तरापथ and commented:

    कुछ वर्ष पूर्व नवरात्री पर लेखमाला लिखी थी| सबके अवलोकनार्थ पुनः प्रेषित …

    टिप्पणी द्वारा uttarapath | अक्टूबर 10, 2018 | प्रतिक्रिया

  4. Sir , very correct objectives must be pure, absolute and for betterment of mankind. Objectives must be well protected, immune from the worldly affairs and must be blessed with spirituality.

    टिप्पणी द्वारा Adwait M Vaidya | सितम्बर 29, 2019 | प्रतिक्रिया

  5. संगठन की दृष्टि से अच्छी प्रेरणा कार्यकर्ता के लिए नवरात्रि पर्व से प्राप्त हुई धंयोष्मी

    टिप्पणी द्वारा Deep singh tomar | सितम्बर 29, 2019 | प्रतिक्रिया

  6. Very well written, a combination of spiritualism and religion to work for society and yuva of future.

    टिप्पणी द्वारा Dr Manoj Rawat | सितम्बर 29, 2019 | प्रतिक्रिया

  7. संगठित होकर समाज के सशक्तिकरण के लिए उत्साह के साथ काम करने के लिए संकल्प लेते हुए नवरात्री की शुभकामनाएं

    टिप्पणी द्वारा Sagar vedantam | सितम्बर 30, 2019 | प्रतिक्रिया

  8. *मी नसतो तर काय झालं असतं?*
    एकदा हनुमान प्रभू श्रीरामाला म्हणाले की, अशोक वाटिकामध्ये जेंव्हा रावण रागाच्या भरात तलवार घेऊन सीता मातेला मारण्यासाठी आला तेंव्हा मला वाटले की याच्याकडील तलवार घेऊन याचं डोकं उडवलं पाहिजे, पण तेवढ्यात मंदोदरीने रावणाचा हात धरला. पण मी जर खाली उतरून रावणाचा हात धरला असता तर मला भ्रम झाला असता की, मी नसतो तर काय झालं असतं…

    अनेकवेळा अनेकांना असाच भ्रम होतो, मलाही वाटलं असतं की मी नसतो तर सीता मातेला कोणी वाचवलं असतं ? पण तुम्ही सीता मातेला वाचवलंच नाही तर वाचवण्याचं काम रावणाच्या पत्नीकडे सोपवलं. तेंव्हा मला समजलं की तुम्हाला ज्याच्याकडून जे कार्य करवून घ्यायचं आहे ते तुम्ही त्याच्याकडूनच करवून घेता.

    पुढे जेंव्हा त्रिजटा म्हणाली की, लंकेत एक वानर आले आहे, ते लंका जाळून टाकणार आहे. तेंव्हा तर मी चिंतेत पडलो की, प्रभू श्रीरामाने तर आपल्याला लंका जाळण्यासाठी सांगितले नाही. आणि ही त्रिजटा म्हणत आहे तर काय करू ?
    पण जेंव्हा रावणाचे सैनिक मला मारण्यासाठी आले तेंव्हा मी बचावासाठी काहीच प्रतिकार केला नाही. आणि जेंव्हा बिभीषण येऊन म्हणाला की, दूताला मारणे अनीति आहे, तेंव्हा मला समजले की प्रभूने मला वाचवण्यासाठी हा उपाय केला आहे.

    आश्चर्याची गोष्ट तर तेंव्हा घडली, जेंव्हा रावण म्हणाला की, वानराला मारले जाणार नाही तर त्याच्या शेपटीला कपडा गुंडाळून त्यावर तूप टाकून आग लावा. तेंव्हा मला समजलं की त्रिजटाचं म्हणणं बरोबर होतं. नाहीतर लंका जाळण्यासाठी मी कुठून तूप, कपडा, अग्नी आणला असता. पण ही व्यवस्था पण तुम्ही रावणाकडून केली. जेंव्हा तुम्ही रावणाकडून सुद्धा काम करवून घेता तर माझ्याकडून करवून घेणं काय विशेष आहे.

    त्यामुळे नेहमी लक्षात ठेवावे की, *आपल्या आयुष्यात जे काही होत* *आहे ते सर्व देव करवून घेत आहे. आपण तर फक्त निमित्ताला* *कारण आहोत. त्यामुळे कधीही या भ्रमात राहू* *नका की मी नसतो तर काय झालं असतं…*

    *🚩।।जय श्री राम।।🚩*

    टिप्पणी द्वारा Sagar vedantam | सितम्बर 30, 2019 | प्रतिक्रिया

  9. लेखक को प्रणाम व साधुवाद।
    सही है भाईसाहब भारत मे समस्त धार्मिक व सामाजिक अनुष्ठान कोई न कोई वैज्ञानिक तत्व लिए हुए है। ओर आपने नवरात्र स्थापना दिवस, नवरात्र उत्सव के प्रथम दिवस शैल पुत्री देवी के दिवस का विश्लेषण किया है वह मेरे लिए प्रथम है ।
    अन्य दिवसों के भी इसी प्रकार के विश्लेषण का जिज्ञासु ।

    टिप्पणी द्वारा डॉ प्रभात | सितम्बर 30, 2019 | प्रतिक्रिया

  10. Excellent thought where society, religion and spiritualism are involved that give rise to unity.

    टिप्पणी द्वारा Dr. Sarjeet Singh Thakur | सितम्बर 30, 2019 | प्रतिक्रिया

  11. संगठन के ध्येय, धोरण के अनुरूप ही हमें कार्य करना हैं। हम संगठन के एक अंग हैं, संगठन ही हमें बल प्रदान करता हैं। इस बल का प्रयोग संगठन के ध्येयपूर्ती के लिये करने का हम संकल्प लेते हैं।माॅं इस कार्य के लिये हमें शक्ति प्रदान करें।

    टिप्पणी द्वारा डॉ.मारोती पवार | सितम्बर 30, 2019 | प्रतिक्रिया

  12. Mata Ji ke aashirvaad se apna sangathan apne sankalpa ki praapti kare, aise kaamna ke saath sabko naman.

    टिप्पणी द्वारा Sanjeev | सितम्बर 30, 2019 | प्रतिक्रिया

  13. माँ शैलपुत्री की इतनी सटीक व्याख्या। सही मायने में आज कार्यकर्ता भाव समझा है। धन्यवाद भैया

    टिप्पणी द्वारा विजायसिंह भदौरिया | सितम्बर 30, 2019 | प्रतिक्रिया

  14. The sanctity of aims and means gives the perseverance and courage to attain those aims. Very beautifully related spirituality with life ideology.

    टिप्पणी द्वारा Preeti wadhwani | अक्टूबर 2, 2019 | प्रतिक्रिया


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