उत्तरापथ

तक्षशिला से मगध तक यात्रा एक संकल्प की . . .

संगठन की घटस्थापना


maa-shailputri1नवरात्री का शुभारम्भ! शक्तिपूजा का उत्सव! यह केवल शक्ति के आध्यात्मिक स्वरूप का पूजन नहीं है। वास्तव में हर स्तर पर ही शक्ति का ही असविष्कार जीवन के रूप में हो रहा है। अतः शक्तिपूजा तो जीवन का ही उत्सव है। उत्स से बनता है उत्सव। मन को जो उपर उठाये वह उत्सव। उपर उठने को ही उत्स कहते है। इसी से उत्साह शब्द भी बना है। जब मन उदात्तता का अनुभव करता है तब उत्साह होता है। उत्साह से ही मानव पराक्रम करने में सक्षम होता है। जीवन में जितना अधिक उत्साह होगा उतना ही महान कार्य हो सकेगा। उत्साह का निमित्त यदि भौतिक, शारीरिक या कि स्पष्ट कहे तो केवल ऐन्द्रिक होने से उत्साह क्षणिक और विध्वंसक हो सकता है। यही कुछ उधार के लिये आधुनिक उत्सवों में देखने को मिलता है। गणेशोत्सव व दूर्गापूजा जैसे पारम्पारिक त्योहारों पर भी इस उथली उफन का परिणाम गत कुछ वर्षों में दिखाई देने लगा है। अतः उत्सव के विज्ञान को समझने की आवश्यकता है। मन को उदात्तता की ओर लेजानेवाले निमित्त से यदि उत्साह को प्रगट किया जाय तो अधिक स्थायी और कल्याणकारी उत्सव मनाये जा सकते है।

अभी तो शक्तिपूजा का उत्सव है। इसे भी उदात्तता से ही मनाना होगा। वर्तमान समय में पूरे विश्व में ही शक्ति की संकल्पना में परिवर्तन हो रहा है। राष्ट्रों की शक्ति का मापन करने में भी अब केवल सामरिक, राजनैतिक व आर्थिक सुदृढ़ता पर्याप्त नहीं मानी जाती। कला संस्कृति, शिक्षा का स्त्र, सामाजिक समरसता जैसे कारक भी महत्वपूर्ण माने जाने लगे हैं। राष्ट्र की सकल शक्ति के आकलन में इनका भी समावेश किया जाने लगा है। इसे ‘समग्र राष्ट्रीय बल’ – स रा ब Comprehensive National Power CNP कहा जाता है। संगठन में शक्ति के मन्त्र का यह वैश्विक प्रतिष्ठापन है। समाज को स्वावलम्बी बनाने के लिये कार्यरत स्वयंसेवी संगठनों की भूमिका स रा ब के दृढ़करण में अत्यन्त महत्वपूर्ण हो जाती है। यह हमेशा से ही रही है अब उसे रणनीतिक मान्यता भी मिल गई है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए हम इस नवरात्री में संगठन की शक्तिपूजा के तत्वों को नवदूर्गा के भिन्न भिन्न रूपों के माध्यम से समझने का प्रयास करेंगे। यह हमारी नवरात्री साधना होगी।

पहले रात्री की देवी है – शैलपुत्री। हिमालय की पुत्री होने के नाते माँ पार्वती का ही यह नाम है। हिमवान की पुत्रीने उसी के समान कठोर तपस्या से भगवान शिव को प्रसन्न किया। यदि हमारे लक्ष्य को हम शिव अर्थात कल्याण करनेवाला मानते है तो हमारा संगठन उन्हें पाने के लिये ही कार्य कर रहा है। इस उद्देश्य में सिद्धी तभी सम्भव है जब संगठन का जन्म उदात्त ध्येय के लिये हुआ हो। ध्येय जितना उँचा होगा उतना ही संगठन का मूल बल अधिक होगा। किसी भी संगठन की प्रथम शक्ति उसके ध्येय की नैतिक उदात्तता होती है। अतः शैल पुत्री का संदेश है। शैलसमान उदात्त विचार से हुआ जन्म। किसी भी संगठन का जन्म एक विचार से होता है। यदि वह विचार संकुचित हो तो संगठन नहीं होगा गिरोह होगा। यदि ध्येय स्वार्थ होगा तो संगठन व्यापारी संस्थान ही होगा। इसी कारण राजनीतिक संगठन जब अपने उदात्त ध्येयवाद को भुला देते है अथवा जिन दलों का जन्म ही व्यक्तिगत अहंकार वा स्वार्थ से हुआ होता है वे शीघ्र ही एक व्यापारी संस्थान का रूप ले लेते है। दीर्घकाल तक मानव कल्याण के कार्य का ध्येय प्राप्त करते हुए कार्य करने वाले संगठन वे ही हो सकते है जिनके मूल में हिमालय सा भव्य व दिव्य विचार होता है।

विचार के उदात्त होने के साथ ही उसके मूर्तरूप में उतरने के लिये प्रखर तप भी करना पड़ता है। पार्वती ने शिवजी को पाने के लिये उग्र तप किया। स्वयं को पूर्ण समर्पित कर दिया। ऐसे समय जब शिवजी उनकी ओर देखने को भी तैयार नही थे तब भी पूर्ण लगन से अपनी तपस्या को जारी रखा। सच्चे कार्यकर्ता को भी ध्येय के प्रति पूर्ण श्रद्धा रखते हुए कार्य करना चाहिये। कई बार बाहरी रूप से कोई परिणाम अथवा यश नहीं दिखाई देता तब भी यदि लगन टिक सकें तो ही अन्ततः लक्ष्य प्राप्ति हो पाती है। इसका एकही मार्ग है सतत अपने जन्म के रहस्य अर्थात अपने संगठन के बीज विचार का स्मरण। यदि उस विचार की उदात्तता वसत्यता पर विश्वास दृढ़ हो तो फिर कितनी भी निराशाजनक परिस्थिति में कार्यकर्ता अपने पथ से विचलित नहीं होता।

माँ शैलपुत्री का नाम ही कार्यकर्ता को प्रेरणा देता है अपने पिता अर्थात अपने मूल को सदा अपने परिचय के रूप में धारण करने की। हमारा विचार ही हमारा सच्चा परिचय होता है। जब हम किसी महान कार्य में जुटे संगठन के अंग होते है तब वह संगठन विचार ही हमारा एकमात्र स्थायी आधार होता है वही हमें शक्ति प्रदान करता है। माता शैलपुत्री का रूप भी अत्यन्त सांकेतिक है। पहले नवरात्री को इसका पूजन करते समय इसके अर्थ को समझना चाहिये। माता का वाहन श्वेत वृषभ है-सफेद बैल। यह शक्ति का सनातन प्रतिक है। हमारी ध्येय साधना को वाहन ऐसा ही बलवान हो। शुभ्र रंग बल की सात्विकता का द्योतक है। बल जब कल्याणकारी होता है तब सात्विक होता है। जब औरों को पीडा देने में बल का प्रयोग होता है तब वह तामसिक बल कहलाता है और जब बल का गर्व कर उसका दुरूपयोग होता है तब वह राजसिक बल होता है। संगठन हमें बल प्रदान करता है वह सात्विक तभी होगा जब हम उसका प्रयोग संगठन की ध्येयप्राप्ति में ही करेंगे अपने स्वार्थ अथवा दुसरों की हानी के लिये नहीं।

शैलपुत्री माता के एक हाथ में त्रिशुल है और दूसरे में कमल। इस प्रतिक का भी यही अर्थ है। कमल शांति का प्रतिक है और त्रिशुल साधनों का। संगठन हमें अनेक शस्त्र अर्थात विविध साधन प्रदान करता है। यह आंतरिक गुणों के रूप में भी होते है और बाह्य संसाधनों सम्पर्कों के रूप में भी। इनका भी उपयोग संगठन के ध्येय के अनुरूप सबके कल्याण व शांति के लिये करना होता है।

आइये! पहले नवरात्री को संगठन की शक्तिपूजा की घटस्थापना करते है। माँ शैलपुत्री की पूजा में हिमालय सा उदात्त विचार व उसके आचरण हेतु तप व प्राप्त बल का सदुपयोग करने का संकल्पलेते है। माता हमें संगठन को सशक्त बनाने का शुभाशिष प्रदान करें।

अक्टूबर 5, 2013 - Posted by | सामायिक टिपण्णी | , , , , , , , , , , , , , ,

2 टिप्पणियाँ »

  1. संगठित होकर समाज के सशक्तिकरण के लिए उत्साह के साथ काम करने के लिए संकल्प लेते हुए नवरात्री की शुभकामनाएं

    टिप्पणी द्वारा लोकेन्द्र सिंह | अक्टूबर 6, 2013 | प्रतिक्रिया

  2. Bahut sundar. Pichle kuchh dino se (jabse patel nagar me rehne aaya hu) mujhe bahut achche achche sundar varnan padhne or sunne ko mil rahe hain. Kal hi Manneeya Nivedita Didi ka Ram Katha ka recorded varnan poora kiya hai 9 din ka. (1 din 1 varnan) Aisa pehle kabhi nahi socha tha ki Ramkatha ye kehti hai. Humne Ram ko imaginary figure bana diya hai. Kal Unka Jeevan sandesh samajh me aaya. Aisa hi Hanuman ek kitne kushal karyakarta hain,ye samajh aaya.
    Maja aaya.

    टिप्पणी द्वारा Naman Sharma | अक्टूबर 6, 2013 | प्रतिक्रिया


एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: