उत्तरापथ

तक्षशिला से मगध तक यात्रा एक संकल्प की . . .

एस्पायर सार्वजनिक विद्यालय की अभिनव शिक्षण पद्धति


न्यूयॉर्क टाइम्स में लेख का सारांश

vikalpअमेरिका स्तिथित एस्पायर सार्वजनिक विद्यालय अध्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम पारम्परिक शिक्षण व्यवस्था से बहुत अलग है | यहाँ पर सिद्धांतो से अधिक महत्त्व व्यवहार को दिया जाता है |

जो स्नातक के विद्यार्थी, शिक्षक बनना चाहते है उन्हें यहाँ  निवासी प्रशिक्षणार्थी  बनकर  अनुभवी मार्गदर्शक की उपस्थिति में पढ़ाने का अवसर मिलता है | जैसे चिकित्सक विद्यार्थी अनुभवी डॉक्टर की उपस्थिति में शल्य क्रिया करते हैं, उसी प्रकार यह प्रशिक्षण ग्रहण करने वाले  शिक्षक अनुभवी मार्गदर्शकों से पढ़ाने की कला सीखते हैं | शुरू में इन्हें कक्षा में विद्यार्थोयों को नियंत्रित करना का कठिन कार्य सिखाया जाता है | यह कला पूरी तरह से सीखने के बाद,वे पढ़ाने पर ध्यान केन्द्रित कर देते हैं | इन प्रशिक्षणार्थी शिक्षको को अत्यल्प छात्रवृत्ति दी जाती  है | उन्हें अक्सर उन विद्यालयों  में भेजा जाता है जहाँ निम्न आय श्रेणी के विद्यार्थी पढ़ते हैं |

अमेरिका की पारम्परिक शिक्षा की व्यवस्था में शिक्षको के प्रशिक्षण को कम महत्त्व दिया गया और विद्यार्थियों के परीक्षा में प्रदर्शन के आधार पर उन शिक्षकों की क्षमता का मूल्यांकन किया जाता था और यह प्रणाली पूरी तरह से विफल रही है  |

एस्पायर model में पांच दिनों के बाद उन प्रशिक्षणार्थी शिक्षको को अकेले कक्षा में भेजा जाता है | वहां पर  नयी नयी विधियों  से पढ़ाया जाता है | जैसे कि जब प्रशिक्षणार्थी शिक्षक पढाते हैं, तब मार्गदर्शक जोर से गाना बजाकर उन्हें विचलित करने का प्रयत्न करते हैं और प्रशिक्षणार्थी शिक्षक तथा विद्यार्थियों के व्यवहार को विडियो कैमरे  द्वारा फिलमाँकन  किया जाता है |शिक्षक पढ़ाते समय विद्यार्थियों का निरिक्षण करते हैं और उनके व्यवहार का धीमी आवाज में वर्णन करते हैं | उससे विद्यार्थियों में अनुशासन बनाये रखने में सहायता मिलती है |

अक्सर यू ट्यूब  के वीडियोस के उपयोग द्वारा दृव्ष श्राव्य http://visual माध्यम से  शिक्षा प्रदान की जाती है | कक्षा में पढ़ाने से पूर्व प्रशिक्षणार्थी शिक्षक और परामर्शदाता शिक्षा प्रदान करने के कार्य का पूर्वाभ्यास करते हैं | प्रशिक्षणार्थी शिक्षक और मार्गदर्शक दोनों मिलकर  शिक्षक और विद्यार्थी की भूमिका निभाकर पढ़ाने का अभ्यास करते हैं |

प्रशिक्षणार्थी शिक्षक अक्सर वह विषय पढ़ाते है जिसका उन्हें स्वयं औपचारिक ज्ञान नहीं होता है और जैसा अपेक्षित होता है, उन्हें पढ़ाने में बहुत कठिनाई अनुभव होती है | जब वे कक्षा में पढ़ाते है, विडियो कैमरा द्वारा उनकी फिल्म ली जाती है और बाद में वह फिल्म  उन्हें दिखाई जाती है ताकि उन्हें अपनी गलती पता चले |

प्रशिक्षणार्थी शिक्षकों को विद्यार्थियों के साथ मैत्रीपूर्ण व्यवहार करने को प्रोत्साहित किया जाता है | जैसे एक शिक्षिका बच्चों को चिडीयाघर ले जाती है और वहां दीवारों पर जो आकृतियाँ हैं उनका क्षेत्रफल निकालने को कहती हैं | प्रारंभ में उन्हें कठिन लगने वाले विषय पढ़ाने को दिए जाते हैं, इसमें उन्हें निश्चित ही कठिनाई होती है | किन्तु कुछ महीनों के इस संघर्ष के बाद उनको उनके स्वभाव के अनुसार विषय और कक्षा का स्तर दिया जाता है |

कई आलोचकों के अनुसार प्रशिक्षण की यह विधि अत्यंत यांत्रिक है | उनके अनुसार मार्गदर्शकों का केवल अनुभव उत्तम शिक्षा हेतु पर्याप्त नहीं है |परन्तु यह model इतना प्रभावी है कि बहुत कम प्रशिक्षणार्थी शिक्षक अधूरे में प्रशिक्षण छोड़ते है और स्नातक बनने के बाद भी किसी और नौकरी में नहीं जाते है , शिक्षक ही बनते हैं |

फ़रवरी 8, 2015 - Posted by | सामायिक टिपण्णी | , , , , , , , , , ,

1 टिप्पणी »

  1. Saarthak Prayaas in USA…

    टिप्पणी द्वारा Sunil Nahar | फ़रवरी 8, 2015 | प्रतिक्रिया


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